ऑपरेशन टाइगर: आरोप-प्रत्यारोप के बीच सियासी जंग तेज
नई दिल्ली: महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' की आहट ने एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल ला दिया है। पिछले कई दिनों से चल रही राजनीतिक अटकलें अब सच होती दिखाई दे रही हैं। खबर है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों ने पाला बदलने का पूरा मन बना लिया है। ये बागी सांसद जल्द ही मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली मूल शिवसेना में शामिल हो सकते हैं, जिससे राज्य का राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है।
लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अलग गुट बनाने की तैयारी
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, उद्धव गुट के ये छह बागी सांसद नई दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं और वे जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक आधिकारिक पत्र सौंप सकते हैं। इस पत्र में वे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट से अलग होने और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को अपना समर्थन देने की घोषणा कर सकते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि 9 में से 6 सांसद (यानी दो-तिहाई बहुमत) अलग होकर नया समूह बनाते हैं, तो वे संसद में एक अलग गुट के तौर पर मान्यता पाने का दावा कर सकते हैं। ऐसा होने पर वे दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत होने वाली किसी भी दंडात्मक या अयोग्यता की कार्रवाई से भी आसानी से बच जाएंगे।
सांसदों की खरीद-फरोख्त के आरोपों पर महुआ मोइत्रा का तीखा तंज
इस पूरे घटनाक्रम पर शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सोशल मीडिया पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सत्ताधारी दल पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के विपक्षी सांसदों को तोड़ने के लिए 15-15 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि (एडवांस) दी गई है।
संजय राउत के इस गंभीर आरोप पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तेजतर्रार सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सोशल मीडिया पर मजे लेते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा, "सिर्फ 15 करोड़ रुपये? इतने सस्ते में क्यों जा रहे हैं भाई? हमारे लोगों को तो 4 करोड़ रुपये एडवांस और अगले 36 महीनों के बचे हुए कार्यकाल के दौरान हर महीने 1 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। इसे कहते हैं 'हनी प्लस मनी'।"
शिवसेना ब्रांड की वजह से बढ़ी कीमत: संजय राउत का पलटवार
महुआ मोइत्रा के इस व्यंग्यपूर्ण ट्वीट का जवाब देने में संजय राउत ने भी बिल्कुल देर नहीं की। उन्होंने पलटवार करते हुए लिखा, "अपना सपना मनी-मनी! नहीं महुआ जी, प्रति सांसद मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) 50 करोड़ रुपये तय है। 15 करोड़ रुपये तो सिर्फ शुरुआत यानी एडवांस है। सच कहूं तो व्यक्तिगत तौर पर इन लोगों की असल कीमत 50 हजार रुपये भी नहीं है। यह तो सिर्फ शिवसेना और टीएमसी जैसी ब्रांड वैल्यू का असर है, जिसकी वजह से बाजार में इनकी कीमत इतनी बढ़ी हुई है।"

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