सरकारी कामकाज से ज्यादा निजी ऐशो-आराम पर फोकस
लखनऊ|यूपी के एक साहब अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी शासन-सत्ता का रुतबा बरकरार रखे हुए हैं। वहीं, एक जूनियर नौकरशाह तो राजधानी के होटलों में मौज-मस्ती कर रहे हैं और एक जिले के डीएम बनने की घोषणाएं कर रहे हैं। पढ़ें, ये अनसुने किस्से:
मास्टर प्लान पर साहब की कुंडली
सेवानिवृत्ति के बाद भी साहब का शासन-सत्ता में रुतबा बरकरार है। तभी तो सरकार के सपनों के शहर रामनगरी के मास्टर प्लान पर भी साहब कुंडली मारकर बैठ गए हैं। ऊपर से मंजूरी के बाद भी एक साल से मास्टर प्लान को इसलिए मंजूरी नहीं मिल पा रही क्योंकि उसमें साहब के मनमाफिक बदलाव होने हैं। चर्चा है कि साहब की बेटर हाफ और कुछ चहेतों की कई जमीनों पर निगाह टिकी है। इसलिए वह प्लान में उस जमीन का भू उपयोग बदलवाने के लिए दबाव बनाए हुए हैं। महकमा प्लान को मंजूरी देने की फाइल आगे बढ़ाता है तो साहब कोई न कोई अड़ंगा डलवा देते हैं।
बात में दम या बड़बोलापन
एक जूनियर नौकरशाह महंगे गैजेट्स और कई सितारा होटलों में मौज-मस्ती के लिए मशहूर हैं। अपने सुपर सीनियर्स के लिए महंगे गिफ्ट देना और उनके साथ डिनर भी हमेशा उनकी योजना में शामिल रहता है। अक्सर राजधानी में देखे जाते हैं। इन सबने उन्हें बड़बोला भी बना दिया है। अब वह अपने दायरे के लोगों में कहते घूम रहे हैं कि कानपुर के नजदीक के एक जिले के डीएम बनने जा रहे हैं। अब उनकी इस बात में दम है या फिर यह उनका बड़बोलापन है, यह तो वक्त ही बताएगा।
ऊंची दुकान, फीके पकवान
एक सियासी दल आजकल सत्ता में आने को आकुल है। हद तो तब हो गई जब उसके एक नेता की तुलना ऐसे दल के अध्यक्ष से की जाने लगी जिसका कद सियासत में उससे कई गुना अधिक है। समर्थकों की इस मुहिम को देख नेताजी खुद भी अपनी मार्केटिंग में जुट गए हैं। अब उनके हर बयान में निशाने पर विरोधी दल के अध्यक्ष रहते हैं। उनकी हालत देखकर पार्टी के बाकी लोग भी कहने लगे हैं कि ये तो ऊंची दुकान और फीके पकवान वाले हैं। चुनाव में कर कुछ नहीं पाएंगे, केवल हौव्वा बनाकर ही अपना काम चला रहे हैं।

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