छोड़ी लाइमलाइट, चुना भगवा; मौनतीर्थ आश्रम में हर्षा रिछारिया का संन्यास संस्कार
उज्जैन: सोशल मीडिया पर कभी अपनी खास पहचान रखने वाली हर्षा रिछारिया अब पूरी तरह अध्यात्म के रंग में रंग चुकी हैं। अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर उन्होंने उज्जैन के मौनतीर्थ आश्रम में संन्यास ग्रहण कर अपने नए जीवन की शुरुआत की।
हर्षा रिछारिया बनीं 'हर्षानंद गिरि'
पंचायती निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज ने उन्हें दीक्षा देकर नया नाम ‘हर्षानंद गिरि’ प्रदान किया। संन्यास की विधि के अनुसार उनका शिखा-दंड संस्कार हुआ और पिंडदान व तर्पण जैसी परंपराएं पूरी की गईं, जो सांसारिक जीवन के त्याग का प्रतीक हैं।
धर्म और संस्कृति को समर्पित
जीवन प्रयागराज महाकुंभ की पेश्वाई में रथ पर सवार होकर सुर्खियों में आईं हर्षा ने अब ग्लैमर की दुनिया से पूरी तरह दूरी बना ली है। उन्होंने संकल्प लिया है कि उनका जीवन अब धर्म, संस्कृति और समाज सेवा के लिए समर्पित रहेगा। 2028 के उज्जैन सिंहस्थ से पहले उनका यह कदम आध्यात्मिक जगत में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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