डर और धमकी में शरीर का समर्पण सहमति नहीं, दुष्कर्म केस में हाई कोर्ट ने 21 साल पुरानी सजा रखी बरकरार
CG News: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के एक गंभीर मामले में सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा को बरकरार रखते हुए आरोपी की अपील खारिज कर दी है. न्यायालय ने स्पष्ट किया कि डर, धमकी या दबाव में दिया गया कथित सहमति, कानून की नजर में सहमति नहीं है.
यह फैसला न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास ने वर्ष 2003 की घटना से जुड़े मामले में सुनाया. आरोपी महावीर चैक को भारतीय दंड संहिता की धाराओं 376 (दुष्कर्म), 323, 342 और 506 के तहत दोषी ठहराया गया था.
क्या है पूरा मामला?
पीड़िता ने 15 मार्च 2003 को थाना नारायणपुर, जिला जशपुर में एफआईआर दर्ज कराई थी. उसने बताया कि 14 मार्च की रात उसका पति मजदूरी के सिलसिले में बाहर गया हुआ था. पति के देर रात तक वापस न लौटने पर वह उसे खोजने निकली, तभी आरोपी महावीर चैक ने उसे कुल्हाड़ी दिखाकर जान से मारने की धमकी दी, मारपीट की और जबरन अपने पिता के घर ले गया.
आरोपी ने पीड़िता को दीवार के ऊपर से घर के भीतर फेंका, जहां उसे चोटें आईं और कांच की चूड़ियां टूट गईं. इसके बाद आरोपी ने उसके साथ तीन बार दुष्कर्म किया. तड़के करीब 3 बजे पीड़िता का पति मौके पर पहुंचा तो आरोपी भाग गया और बाद में रिपोर्ट दर्ज कराई गई.

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