मीना कुमारी-कमाल अमरोही की दी गई सोसाइटी पर कोर्ट का फैसला, 6 महीने में खाली करने का आदेश
गुजरे जमाने की फिल्म अभिनेत्री मीना कुमारी और निर्देशक कमाल अमरोही से जुड़ी प्रॉपर्टी पर एक कोर्ट के फैसले से वहां रह रहे लोगों की टेंशन बढ़ गई है. मुंबई के बेहद पॉश इलाकों में से एक पाली हाउसिंग सोसाइटी के 162 परिवारों को एक लोकल कोर्ट ने 6 महीने के अंदर इसे खाली करने का निर्देश दिया है.साल 1959 में, मीना कुमारी और उनके पति, फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही ने मिलकर 5 लाख रुपये में पाली हिल में 2.5 एकड़ का प्लॉट खरीदा और इसे एक डेवलपर को लीज पर दे दिया, जिसने कोजीहोम कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी (Cozihom Cooperative Housing Society) नाम से 5 बिल्डिंग्स बनाईं.
किराए को लेकर शुरू हुआ था विवाद
लेकिन कुछ साल बाद ही जमीन को लेकर विवाद शुरू हो गया. 1970 के दशक की शुरुआत में कमाल अमरोही ने सोसाइटी पर लीज पर दी गई जमीन (8,835 रुपये प्रति माह) का पूरा किराया न देने का आरोप लगाया. तब सोसाइटी ने अपनी सफाई में यह कहा कि उसकी ओर से कम भुगतान इसलिए किया जा रहा है क्योंकि जमीन का कुछ हिस्सा जमीन मालिक का नहीं था. फिर 1991 में, फिल्म निर्देशक कमाल अमरोही ने 66,060 रुपये के किराए के बकाया के कारण जमीन से बेदखली और कब्जा करने के लिए केस दायर कर दिया. हालांकि 2 साल बाद ही उनकी मौत हो गई लेकिन उनके बच्चों ने कानूनी लड़ाई जारी रखी.
6 महीने में सोसाइटी खाली करने का आदेश
अब पिछले महीने, 23 अप्रैल, 2025 को बांद्रा की एक कोर्ट ने कमाल अमरोही के बेटे ताजदार अमरोही और बिल्डर अरहम लैंड डेवलपर्स के पक्ष में फैसला सुनाया. केस के बारे में उन्होंने अखबार TOI को बताया, “हमने केस जीत लिया है. सोसाइटी को अगले 6 महीने के भीतर खाली करने के लिए कहा गया है.” हालांकि कोजीहोम के लोगों का कहना है कि बेदखली के आदेश को चुनौती देने के लिए सोसायटी अगले महीने बॉम्बे हाई कोर्ट जाएगी. इस आदेश से 162 परिवार विस्थापित हो जाएंगे, जिनमें से ज्यादातर लोग वरिष्ठ नागरिक हैं और उन्होंने 50 साल से भी पहले यहां पर अपार्टमेंट खरीद लिए थे. उन्होंने कहा, “सोसाइटी ने पहले ही ब्याज सहित सभी लंबित किराए का भुगतान कर दिया है. सोसाइटी पिछले 2 दशकों से एस्क्रो खाते (Escrow Account) में पैसा जमा कर रही है.” उन्होंने बताया, “पूरा विवाद सिर्फ जमीन से जुड़ा है, उस पर बनी इमारतों से नहीं. हम हाई कोर्ट में अपनी अपील में इस बात को रखेंगे.”
अभी कितनी है प्रॉपर्टी की कीमत
कोर्ट ने कहा, “प्रतिवादी ने 1 अप्रैल 1971 से फरवरी 1972 तक 8,835 रुपये की तय दर के हिसाब से किराया नहीं दिया. उसके बाद प्रतिवादी ने 7,000 रुपये किराया दिया.” कोर्ट ने यह भी कहा, “यह स्वीकार किया जाता है कि वादी ने 30 नवंबर 1990 को इस मामले में नोटिस दिया था, लेकिन प्रतिवादी ने नोटिस का पालन नहीं किया और बॉम्बे रेंट एक्ट की धारा 12 (2) के तहत उपलब्ध लाभ का लाभ उठाने में नाकाम रहा.” इस बीच, बिल्डर, अरहम लैंड डेवलपर्स ने तर्क दिया कि उसने ताजदार अमरोही से 5 करोड़ रुपये में यह जमीन खरीद ली और 19 मई 2010 को पंजीकृत रजिस्टर्ड डीड ऑफ कन्वेयंस द्वारा 3 इमारतों के साथ 9,849 वर्ग मीटर जमीन पर अधिकार और लाभ हासिल किया. दावा किया जा रहा है कि पाली हिल प्लॉट की कीमत इस समय करीब 1,000 करोड़ रुपये से अधिक है.

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