OBC आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त, मध्य प्रदेश सरकार को दिया अल्टीमेटम

जबलपुर : ओबीसी वर्ग के आरक्षण पर जबलपुर हाईकोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. दरअसल, OBC वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण देने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत व जस्टिस विवेक जैन की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों (राज्य सरकार व अन्य) को जवाब पेश करने की अंतिम मोहलत प्रदान की है. युगलपीठ ने चेतावनी दी है कि अगली सुनवाई में जवाब पेश नहीं किए जाने पर अनावेदकों पर सख्ती करते हुए कॉस्ट लगाई जाएगी. आगे जानें क्या है ओबोसी आरक्षण का ये मामला.
क्या है OBC आरक्षण मामला?
दरअसल, ओबोसी आरक्षण संबंधी ये याचिका एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक एंड सोशल जस्टिस की ओर से दायर की गई थी. इस याचिका में कहा गया कि मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को संख्या के अनुपात से आरक्षण का लाभ प्रदान किया जाए. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार मध्य प्रदेश में एससी की 15.6 प्रतिशत, एसटी की 21.14 प्रतिशत, ओबीसी की 50.9 प्रतिशत, मुस्लिम की 3.7 प्रतिशत आबादी है. शेष 8.66 प्रतिशत अनारक्षित वर्ग की जनसंख्या है.
प्रदेश में सबसे ज्यादा ओबोसी होने का दावा
याचिका में आगे कहा गया कि मध्य प्रदेश में एससी को 16 फीसदी, एसटी को 20 प्रतिशत और ओबीसी को 14 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है. हालांकि, प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 51 प्रतिशत है. इस वजह से ओबीसी वर्ग को प्रदेश में आबादी के अनुपात में आरक्षण का लाभ दिया जाना चाहिए. याचिका में इंदिरा साहनी बनाम भारत संघ के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया गया. इस मामले में सभी राज्यों को निर्देशित किया गया था कि ओबीसी वर्ग के निर्धारित मापदंडों के आधार पर उनकी सामाजिक, आर्थिक शैक्षणिक स्थितियों का नियमित रूप से परीक्षण करने के लिए स्थायी आयोग गठित किया जाए.
11 बार हो चुकी मामले में सुनवाई
याचिका में कहा गया, '' आयोग तो बना लेकिन ओबीसी वर्ग के उत्थान के लिए काम नहीं किया जा रहा है. याचिका पर विगत एक साल में 11 बार सुनवाई हुई लेकिन सरकार की ओर से जवाब पेश नहीं किया गया.'' युगलपीठ ने सुनवाई के बाद चेतावनी के साथ राज्य सरकार को जवाब पेश करने अंतिम मोहलत प्रदान की है. याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ने पैरवी की.